तो ठीक है, ना
अगर पहुंच नहीं पाए जिधर पहुंचना था।
क्या पता, यहां किसी को
हमारा इंतज़ार था।
तो ठीक है, ना
अगर खो जाए अपनी कोई अमानत।
शायद किसी ऐसे को मिल गयी होगी,
जिसको उससे ज़्यादा प्यार था।
तो ठीक है, ना
अगर लाख कोशिशें भी हों नाकाम।
कभी कभी, हार का भी स्वाद
चख लेना चलता है।
तो ठीक है, ना
अगर एक-आध बार गलत मोड़ ले भी ली।
ज़िन्दगी है, मियाँ - यहाँ
हर इनसान फिसलता है!
तो ठीक है, ना
अगर काले बादल घेर भी लें चाँद को,
रौशनी लेकर फिर एक बार
सवेरा ज़रूर आता है।
तो ठीक है, ना
अगर कुछ चोट अभी भी चुभते हैं -
दर्द खत्म भले न हो, वक़्त के साथ
कम ज़रूर हो जाता है।
तो ठीक है, ना
अगर वो हासिल होता नहीं
जिसके पीछे साँस रोक के
दौड़ लगाई है।
तो ठीक है, ना
अगर कुछ सपने अधूरे रह जाएँ
किस्मत ने कई और खुशियाँ
भी तो दिलाई हैं!
तो ठीक है, ना
अगर हर दौर पर ठोकर खाना पड़े -
आख़िर चलना सीखना है अगर, तो
गिरना भी तो ज़रूरी है।
तो ठीक है, ना
अगर कुछ यार रूठ जाएँ, कुछ रिश्ते टूट जाएँ
कुछ कहानियाँ अच्छी भी तो इसलिए लगती हैं
क्योंकि वो अधूरी हैं।
तो ठीक है, ना
अगर सब ठीक नहीं भी है
सिर्फ़ सीधी लकीरों से
कहाँ कोई तस्वीर बनी है?
तो ठीक है, ना
अगर फ़िलहाल मुस्कुराने की कोई वजह नहीं है
बग़ैर उलझनों के, कहाँ
किसी की भी तक़दीर बनी है?
तो ठीक है, ना
अगर मेरी दुख भरी कहानी में
छुपा कहीं न कहीं तुम्हारा
अपना भी कोई क़िस्सा है।
तो ठीक है, ना
कम से कम अकेला तो कोई नहीं है,
हर किसी की ज़िंदगी में
अपने-अपने दर्द का हिस्सा है।
तो बस, जब जब ज़िन्दगी परेशान करे
मुस्कुराकर बोलेंगे, "ठीक है, ना!"
जो होगा, देखा जाएगा। और अगर देखा न भी गया,
तो ठीक ही है, ना!
The Tranquill Poet 🤍
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