कुछ लोगों की मुस्कुराहटें, खास होती हैं।
कुछ लोगों के साथ रहो, तो खामोशियाँ भी खास बन जाती हैं।
कुछ लम्हे सिर्फ़ लम्हे नहीं, यादें होती हैं।
कुछ यादें हंसाती हैं, तो कुछ यादों से आँखें भर आती हैं।
कुछ लोगों के आने से, ज़िंदगी में महफ़िल छा गई
उनका साथ, उनकी बातें, इस बेवक़ूफ़ दिल को भा गईं।
कुछ तो बात है इन लोगों में, जो आदत थे, आज़ ज़रूरत बन गए
धूप में तड़पते थे हम, ये बहार बनकर आये - और राहत बन गए।
कुछ तो खास है इनमें, वरना ये इतना दिल को क्यों भाते हैं?
कब बन गए ये इतने अहम, कि हम इन्हें
कभी अलविदा कहना नहीं चाहते हैं?
बड़ा क़रीब है मेरे दिल के, वो लम्हा
जब इनसे पहली मुलाक़ात हुई थी।
अनजानों के अपने बनने की, ख़ूबसूरत सी
कहानी की जो शुरुआत हुई थी।
सलामत है दिल की गहराइयों में, हर एक
लफ़्ज़ जो उन्होंने कहा है।
न कभी किसी से इतना प्यार हम कर सकेंगे,
न आज तक कोई इतना प्यारा रहा है।
एक सुकून है उनके साथ में,
सीख है उनकी कही हुई हर बात में
जो साथ निभाती है, हर हालात में।
कुछ तो बात है इनमें, जो ये इतने ख़ास बन गए
सिर्फ़ शख़्स रहे नहीं ये अब, बल्कि
हमारी हिम्मत, हमारी आस बन गए।
कुछ तो खास है!
The Tranquill Poet 🤍
Comments
Post a Comment