क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुम्हारी life को लेकर, तुम्हारे सिवाय
हर किसी का अपना कहना होगा।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुमने बचपन से यही सीखा होगा कि
"मुझे चुपचाप सब कुछ सुनना - सहना होगा"।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
school के साथ साथ life भी रोज़ तुम्हारी exam लेगी,
और तुम्हें हर exam में first आना होगा।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
बेटी, बहन, बीवी, बहू, माँ, सास, दादी -
हर रिश्ता तुम्हें बखूबी निभाना होगा।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
Maths में तुमने पढ़ा हो न हो, life ने तुम्हें
limits के बारे में ज़रूर सिखाया होगा।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
क्या पहनना है, किससे बात करनी है, कैसे रहना है -
हर मोड़ पर "समाज" ने तुम्हें रास्ता दिखाया होगा।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुम्हें लगता होगा कि 'शायद मेरी अपनी, खुद की
कोई आवाज़ ही नहीं है'।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
पल-पल ये एहसास होता होगा कि
तुम्हारे life की चाबी तो तुम्हारे पास ही नहीं है।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
वैसे तो तुम में स्वयं देवी लक्ष्मी का वास है।
लेकिन 'वो' वाले दिन में..
दूर रहना, बेटा! यही हमारा रिवाज़ है।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
अगर चोली पहन लो तो बहन जी हो,
eyebrow piercing कर ली तो मॉडर्न नारी।
अपने हक की बात करो तो "वो feminist types",
और अगर ना करो तो damsel in distress, बेचारी।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुम्हें हर कदम पर, दुनिया को देना
अपनी काबिलियत का सबूत होगा।
और क्यूंकि तुम लड़की हो,
ये बात लोगों की समझ के बाहर है, कि
किसी की बीवी या बेटी होने के आगे,
तुम्हारा अपना भी कोई वजूद होगा।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
घर हो चाहे workplace, patriarchy के सामने तो
तुम्हें झुकना ही झुकना होगा।
लेकिन पल्लू संभालके!
क्यूंकि तुम लड़की हो, आखिर male gaze से खुद को
बचाके भी तो तुम्हें रखना होगा!
क्यूंकि तुम लड़की हो,
Bedroom में 'उन' की कठपुतली और सड़क पे,
मर्दों के हाथ लगी तो बस एक गुड़िया हो।
और क्यूंकि तुम लड़की हो,
ये rule तुम पर हमेशा लागू रहेगा - चाहे तुम
बच्ची हो, जवान हो, नवजात शिशु या फिर बुढ़िया हो।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुम्हारी skirt की length और casual-सी side hug
में छिपे hints, वो बड़ी जल्दी पढ़ लेता है।
लेकिन साफ़ साफ़ NO कहने का
दुस्साहस कतई न करना - क्या है ना,
उससे fragile male ego बड़ा hurt हो जाता है!
क्यूंकि तुम लड़की हो,
"Party करनी हैं तुम्हें? अरे, इतनी revealing dress?
धीरे से, तुम्हारी हंसी क्यों इतनी obnoxiously loud है?"
क्यूंकि तुम लड़की हो,
"वो तो society तुम पर अभी मेहरबान है,
इसीलिए तुम्हें सांस लेना तक allowed है।"
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुम्हारी character पर उंगली और कामयाबी पर सवाल
उठाने वाले आएंगे ढेर सारे।
Work-life balance के समुंदर में जूझती हुई
तुम्हारी कश्ती को, शायद नजर भी नहीं आएंगे
'me-time' वाले किनारे।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुमसे कहा जाएगा, तुमपर हाथ उठाना
तुम्हारे 'उन'का अधिकार है, आखिर
करते वो तुमसे जो प्यार हैं।
लेकिन तुम, गलती से भी
नजरें तक न उठाइयो जी -
क्या यही तुम्हारे माँ-बाप के दिए हुए संस्कार हैं?
लेकिन :
क्यूंकि तुम लड़की हो,
ज़रूरी नहीं कि sacrifices ही तुम्हारी फ़ित्रत हों।
फूल हो, तो महको,
पर ज़रूरी नहीं कांटे या कीचड़ ही तुम्हारी किस्मत हों।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
देवी बनने की तुम्हें बिलकुल ज़रूरत नहीं है,
just because दुनिया को एक imperfect woman -
नहीं नहीं, एक HUMAN woman की
आदत नहीं है।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
याद रखना - तुम ना किसी पर भोज हो,
ना किसी की जिम्मेदारी हो।
लड़ती रहो उस दिन के लिए,जब
तुम घर संभालोगी या career, या दोनों -
ये choice सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी हो।
क्यूंकि तुम लड़की हो,
तुम हर वो काम कर सकती हो,
जो तुम करना चाहती हो।
तो आज से, खुद से रिश्ता निभाना शुरू करो,
उतनी ही शिद्दत से, जिससे
हर रिश्ता तुम निभाती हो।
The Tranquill Poet 🤍
P. S. - inspired by Shweta Tripathi's spoken word piece "Kyunki Tum Ladki Ho"
Such a touching post ♥️ loved reading it all hearts to youu ♥️
ReplyDeleteSuch a beautiful piece of art!♥️
ReplyDeleteIt's beautiful and pretty touching
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